ज्यादा बोलने वालों से क्यों बेहतर होते हैं कम बोलने वाले?

कम बोलने वाले लोगों की खासियतें: आज का दौर में कम बोलने वाले लोगों पर किसी का ध्यान अक्सर ही कभी जाता होगा क्योंकि ज्यादा बोलने वाले लोग ग्रुप में सबको आकर्षित करते हैं क्योंकि वो हमेशा बोलते रहते हैं, बोलते रहते हैं, जिस कारण वे जल्दी से ग्रुप में नोटिस हो जाते हैं। 

लेकिन क्या आप जानते हैं कि जो लोग कम बोलते हैं उनमें बहुत सारी अच्छी और दिलचस्प बातें भी होती हैं और ये उनसे अच्छे होते हैं जो ज्यादा बोलते हैं, कौन-कौन सी अच्छी बातें होती हैं? क्या आप जानना चाहेंगे?

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अगर आप भी कम बोलते तो आपको यह लेख पढ़ना चाहिए कि ज्यादा बोलने वालों से कैसे बेहतर हैं आप, और कम बोलने के फायदे क्या हैं? आज हम बात करेंगे कि ज्यादा बोलने वालों से क्यों बेहतर होते हैं कम बोलने वाले लोग?बहुत मजा आएगा। चलिये शुरू करते हैं——

कम बोलने वाले लोगों का अनोखा स्वभाव-

सबसे पहले बात करते हैं इन कम बोलने वालों के स्वभाव की तो इनका स्वभाव रोचक, रहस्यों से भराहुआ और अद्भुत होता है मतलब ये एक अनोखे स्वभाव के मालिक होते हैं। अगर आप भी कम बोलते हैं 

तो आपके अंदर भी ये बातें छुपी हो सकती हैं और यह लाज़मी भी है क्योंकि जब आप ज्यादा बोलेंगे तो अपनी बातों को ज्यादा रिवील यानी उजागर करेंगे अपने भेदों या रहस्यों को ज्यादा बताएंगे। 

वही अगर आप कम बोलेंगे तो अपने रहस्यों को नहीं बताएंगे और वैसे भी कम बोलने वाले लोग ही आज सबसे ज्यादा सफल हो रहे है… मसलन कोई बिजनेस में सफल हो रहा है तो कोई अपने अनोखे स्वभाव से।

अक्सर समझदार लोग उनसे बात करना पसंद करते हैं जो कम बोलते हैं। आपने देखा ही होगा कि जो लोग कम बोलते हैं जो ग्रुप का हिस्सा नहीं होते हैं, लोग उनको गालियां देते हैं जैसे- बड़ा खडूस है, बात ही नहीं करता, पता नहीं क्या समझता है अपने आपको?, बड़ा ईगो में रहता है, बड़ा एटीट्यूड मेंरहता है। 

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वही हमें (कम बोलने वाले लोगों को) लगता है कि वह लोग हमें गाली दे रहे हैं या वह लोग हमें गलत समझ रहे हैं जबकि ऐसा नहीं होता है। वास्तव में वे लोग हमसे ईर्ष्या महसूस कर रहे होते हैं कि हम उनको अटेंशन या भाव क्यों नहीं दे रहे? कभी गौर कीजिएगा वे लड़कियां जो नोटिस हो रही होती है 

जिनको अपनी मौजूदगी नोटिस कराने में मजा आ रहा होता है, जिनके पीछे सारे लड़के होते हैंवही एक लड़का उनके पीछे नहीं होतातो वह उस लड़के को गाली दे रही होती है कि यह पता नहीं अपने आप को क्या समझता है?, गंदी सी शक्ल वाला, बड़ा एटीट्यूट है, बड़ा ईगोस्टिक है। 

असल में वो लड़कियां उससे जलन महसूसकर रही होती हैं कि वो लड़का हमें भाव क्यों नहीं देता? जहां पूरा कालेज मेरे पीछे पड़ा है पर यह लड़का मुझे भाव क्यों नहीं दे रहा? 

ऐसे ही होता है जब हम किसी को भाव नहीं देते। लोग हमें खडूस समझते हैं लेकिन हमें ऐसा कुछ फील करने की जरूरत नहीं है क्योंकि हमें पता है कि हम रहस्यमयी और अनोखे स्वभाव के हैं, हम ऐसे ही सबसे बात नहीं करते, हमारी चुनने की तकनीक अलग और सबसे अनोखी होती हैं। रहस्यमयी लोगों के अंदर बहुत सारे राज़ छुपे होते हैं। 

वहीं ज्यादा बोलने से क्या होता है? राज़ खुलने की संभावना बढ़ जाती है और कभी-कभी राज़ खुल भी जाता है तो फिर लोग इगनोर करने लगते हैं। तो राज़ को राज़ ही रहने दो और मजे की बातयह है कि राज़ रखने में भी बड़ा मजा आता है।

मन की बात-

कम बोलने वाले लोग बहुत सहज और ज्ञान से युक्त होते हैं। सहज और ज्ञान युक्त को आप समझ सकते हो जो 6th sense का प्रयोग करता हो, जो अपने मन की बात को सुनें, जो अपने दिल की बात को सुनें। 

अगर आप कम बोलते हो तो अक्सर आपके साथ ऐसा होता होगा कि यदि कोई नेगेटिव फीलिंग आ रही होती है जैसे- कुछ गलत होने वाला है तो आपको इसका आभास पहले से ही हो जाता है। 

कभी-कभी आप बहुत खुश होते हो, ऐसे ही खुश होते हो तो लोग पूछते हैं क्यों भाई क्यों खुश हो?” असल में तुम सहज ही खुश होते हो तो सब कुछ ठीक और अच्छा हो जाता है। आपके मन की बात जो होती है उसे अक्सर आप अपने सपने में देख लेते हो। 

कभी-कभी आपको पहले से ही आभास हो जाता है कि किसी के साथ कुछ अच्छा होने वाला है तो उसके साथ वह हो जाता है पता नहीं कैसे, कुछ मैजिक, कुछ चमत्कार या करिश्मा होता है पर हो जाता है। 

और कम बोलने वाले लोगों के साथ अक्सर ये चीजें होती ही रहती हैं क्योंकि ये अपने मन की बातें सुनते हैं अपने तर्क को इतना ज्यादा नहीं लगाते। अपने दिल को सुनते हैं और सही मायनों में दिल काम कर जाता है क्योंकि हमारा अवचेतन मन हमें सही चीजें बताता है, सही डायरेक्शन में ले जाता है।

सकारात्मक और रचनात्मक-

सकारात्मक और रचनात्मक यह एक गुण कम बोलने वालों में कूट-कूट कर मिलता है, क्योंकि ये मुश्किल हालातों में भी सकारात्मकता या पॉजिटिविटी को ढूंढ लेते हैं। कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो कि अपनी जिंदगी से थोड़े निराश हो जाते हैं कि क्या करूं?, कैसे क्या होगा

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि कम बोलने वाले लोग निराश नहीं होते, “निराश हर एक इंसान होता है लेकिन ये चीजों में आसानी से पॉजिटिविटी ढूंढ ही लेते हैं। थोड़ा निराश होने के बाद ये खुद को मोटिवेट करके कहते हैं- चलो ठीक है, कोई बात नहीं,  आगे जैसा होगा अच्छा ही होगा, और आगे बढ़ जाते हैं.

थोड़ा बहुत निराश होना तो बनता है और यह जरूरी भी है क्योंकी जीवन के उतार चढ़ाव ही एक अच्छे व्यक्तित्व का निर्माण करते है। कम बोलने वालों के साथ जब कुछ बुरा या गलत होता है तो खुद से कहते हैं कि मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था। 

थोड़ा रोने-धोने और अपने विचारों का मंथन करने के बाद ये पहले की तरह खुश और नॉर्मल हो जाते हैं यानी की टेंशन को ज्यादा देर तक कैरी नहीं करते हैं। वहीं कुछ लोग होते हैं जो कि अपने आपको दिखाते तो बड़ा कूल हैं, पर टेंशन उनके अंदर बहुत ज्यादा होती है। जो कि मानसिक बीमारी या अवसाद का कारण भी बन सकती है.

क्या आपने कभी सोचा कि जो आत्महत्या या सुसाइड कर लेते हैं, उनके बारे में अक्सर क्या कहा जाता है? उनके बारे में ये कहा जाता है कि ये बंदा बड़ा खुश रहता था, इसने तो कभी दिखाया ही नहीं कि ये तनावग्रस्त था इसके अंदर तो टेंशन थी नहीं। 

इसका कारण यह है कि जो लोग अपनी टेंशन को दिखा देते हैं, उन लोगों का गुस्सा शांत हो जाता है, लेकिन अगर आप अपनी टेंशन किसी को दिखाते नहीं हो तो आपके अंदर ही अन्दर, वह build-up होती रहती है। 

और कहीं ना कहीं यह टेंशन ही बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचा जाती है। जो लोग डिप्रेशन के शिकार होकर हैकिंग लाइफ के कदम उठाते हैं। उन्हें डिप्रेशन से बचने के लिए एक-दो चीजें लोगों से बता देनी चाहिए, अगर किसी को बता नहीं सकते तो खुद से बतिया लिया करें मतलब self-talk कर लिया करें। आप सबको बताते फिरें यह भी गलत है और आप किसी को न बताएं यह भी गलत। 

सबसे बढ़िया तरीका है self-talk यानी कि खुद से बातें करें कि मुझे ऐसा-वैसा नहीं करना चाहिए था। लेकिन चलो ठीक है, कोई बात नहीं। इस तरह की बातें खुद से बोला करें, यह सब पागलों की निशानी नहीं होती है। खुद से बातें करें, self-talk करें और इसमें बड़ा मजा भी आता है। ऐसा करने से आप खुद को जानोगे, परखोगे 

अगर यह भी नहीं कर सकते तो आप डायरी लिखा करो। डायरी भी नहीं लिख सकते तो रिकॉर्डिंग ऑन कर लो। उसमें अपना अपडेट डाल दो डायरी में और फिर अपनी पूरी day by day की कहानी बता डालो कहानी लिखकर या सुनाकर। चाहो तो डिलीट कर देना अगर आपको लगता है कि आपकी डायरी किसी के हाथ पड़ जाएगी…… बहुत आसान है।

निरीक्षण का गुण-

कम बोलने वाले अक्सर बड़े सटीक निरीक्षक (invigilator) होते हैं। इनमे चीजों का निरीक्षण करने और चीजों को समझने की विशेष क्षमता का गुण होता है। अगर आपको अच्छा बोलना है या फिर अपने आपको लोगों में नोटिस कराना है तो हमेशा अपने मुंह को बंद रखो और अपने कान और आंखों को खुला रखो। 

यह बड़ा जरूरी तथ्यहै कि जब आप अपने कानो को खुला रखते हैं तो आपको पता होता है कौन, कैसे बोल रहा है?,क्यों बोल रहा है?, उसका उद्देश्य क्या है?और वही जब आप अपनी आंखें खुली रखते हो तो आपको पता चलता है कि सामने वाले की body language के हाव-भाव क्या हैं और क्या सन्देश दे रहे हैं? 

किसी को पता नहीं उसके बारे में लेकिन आपको पता होता है कि यह इंसान उसे यह बातें इसलिए कह रहा है क्योंकि उसको अपना मतलब सिद्ध करना है। आप भांप जाते हैं लेकिन उसको समझ में नहीं आ रहा होता और न ही आप उसे बताते हैं, बस मन ही मन में सोचते हैं कि ठीक है, भई। दुनिया है जैसी चल रही चलने दो हमें क्या लेना देना। कल को मेरे को नुकसान पहुंचाएगा, तो देख लेंगे। 

देखिये ज्ञान देने से लोग नहीं समझते, उनको तभी समझ में आता है जब वो समझना चाहते हैं। खुद पर बीतती है तो इंसान समझ जाता है। वैसे कम बोलने वाले लोगों को लगभग सब पता होता है लेकिन ये ऐसा दिखाते हैं कि मैं कुछ भी नहीं जानता, मैं बेवकूफ़ हूं, मैं मूर्ख हूं।” 

यह जो होता है एटीट्यूट कि मैं मूर्ख हूं, मैं पागल हूं इसका आप  मजा ले रहे होते हैं, जब लोग कहते हैं ना कि ये तो बेवकूफ है, यह तो कम बोलता है इसको दुनियादारी के बारे में ज्ञान नहीं है। 

हमें पता है हममें बड़ा ज्ञान है तुम हमें मत सिखाओहमें इसी चीज का मजा आ रहा होता है। ठीक है तुम जो समझना चाहते हो वो समझ लो, मेरा काम निकाल रहा है मुझे क्या फर्क पड़ता है?”

आसानी से भरोसा नहीं करते-

ये यूं ही किसी पर भरोसा नहीं करते हैं कि कोई राह चलते मिल गया, उससे दोस्ती कर ली, उसे घर पर बुला लिया, कॉल करने लगे, दोस्ती-यारी हो गई। ऐसा-वैसा कुछ नहीं होता इनके साथ। 

दोस्ती का मामला इनके लिए बड़ा खास और टाइम टेकिंग प्रोसेस होता है यह दोस्ती करके तो बात भी नहीं करते मतलब यूं ही बात नहीं करते किसी से। बहुत कम लोगों से ये बात करते हैं और अक्सर ये उनसे बात करते हैं जो इनके ही जैसे ही होते है।

ज्यादातर लोग जो बोलते रहते हैं, जो दिन भर पटर-पटर बोलते ही रहते हैं, ऐसे लोगों से तो इनकी पटरी ही खाती। ये बढ़-बढ़ करने वालों का चुनाव अपनी दोस्ती के लिए नहीं करते। इन्हे ऐसे इंसान अच्छे लगते हैं जो loyal यानी ईमानदार होते हैं। 

उन्ही से अच्छी दोस्ती रखते हैं। धीरे-धीरे जब ये और भी कंफर्टेबल हो जाते हैं तो इतना ज्यादा बोलते हैं कि बेहद बोलते हैं और इनके पास बहुत सारे टॉपिक्स भी होते हैं क्योंकि मन में सब कुछ भरा हुआ है….. । कम बोलने का मतलब यह नहीं कि इन्हे बातें करनी ही नहीं आती 

ये भी इंसान ही है, इनके दिमाग में चीजें तो आती है, इसलिए खूब बोलते हैं। हालांकि ये कम लोगों के साथ खुलकर बात करते है और यह सही भी है क्योंकि सबके साथ खुलने की जरूरत ही क्या है?

अकेले रहते हैं-

ये जो पार्टियां, समारोह आदि होते हैं ये सब इन कम बोलने वाले लोगों को कोई खास पसंद नहीं आते। ये इनमें शामिल तो होते हैं पर जल्द ही चले भी जाते हैं। क्या आपको पता है कि पार्टियों में जो सबसे अलग अकेला बैठा होता है

वो अक्सर कम बोलने वाला एक इंसान ही होता है। शिकायतें, चुगलियां यह सब इन्हे पसंद नहीं होती। लेकिन जब मजबूरी हो तब तो बैठना ही पड़ता है फिर भी ये अपने आपको सबसे अलगरखते हैं। 

ये अपने आपको बड़ा बिजी दिखाएंगे जैसे- अपने फोन में बिजी हो जाएंगे, कुछ करने लग जाएंगे, कुछ और सोचने लग जाएंगे, इधर-उधर देखने लग जाएंगे क्योंकि इनको मजा ही नहीं आता इन चीजों में। दुनिया में जो फालतू या नकली चीजें हैं इनको अच्छी नहीं लगती।

जो लोग अच्छे-अच्छे कपड़े पहन लेंगे, अपने आपको पहाड़ जैसे सजा लेंगे वे लोग अंदर से खाली और खोखले होते हैं। ये ऐसे लोगों से दूर रहते हैं इनको लगता है कि यार बाहर से अच्छे बनो कोई दिक्कत नहीं है पर अंदर से भी नकलीपन मत लेकर आओ। 

जो तुम अंदर हो, उसे भी कहीं न कहीं और किसी न किसी तरीके से बाहर भी दिखाओ। ये लोग इंसान को अंदर से पहचान जाते हैं वो भी बड़ी जल्दी। सामने वाला क्या है, उसकी हैसियत क्या है? 

मुझे पता है, मुझे मत सिखाओ ऐसे शब्द बोलने वालों से ये थोड़ा दूर रहते हैं विशेषत: नकलीपन से दूर रहते हैं। ये वास्तविक दुनिया को देखना पसंद करते हैं, प्रकृति को देखना पसंद करते हैं

जैसे पार्क हो गए, हरियाली हो गई, यह चीजें इनको बड़ा सुख देती हैं, बड़ा मजा आता है। कुतर्क या कुतर्क करने वालों से इनकी कुछ खास बनती नहीं है।

बहकावे में नहीं आते-

किसी के बहकावे में आ जाना या किसी के चढ़ाने में आ जाना जैसे- कोई हमें चढ़ा देता है कि अरे तेरे को ऐसा बोल दिया, वैसा बोल दिया, ऐसी बात कर रहा है, मैं तेरी जगह होता तो यह कर देता, वो कर देता। वगैरह-वगैरह इसी को कहते हैं बहकावे में आना। 

तो ये लोग यूं ही किसी के बहकावे में नहीं आते। इनको सारी बातों का पता होता है लेकिन ऐसा दिखाते हैं कि इन्हे कुछ भी नहीं पता। 

ऐसा दिखाएंगे कि ये उनकी बातों में आ रहे हैं लेकिन इनका दिमाग चलता रहता है अंदर ही अंदर. बड़े शातिर और छुपे रुस्तम होते हैं ये लोग। न जाने लोग कैसे कहते हैं कि कम बोलने वालों में दिमाग नहीं होता? 

जबकि सबसे अच्छी बात तो यह होती है कि ये किसी की बातों में नहीं आते और अगर किसी बातों में या किसी मामले में इन्हे बुरा लगता है तो अपने दुश्मन को जवाब भी देते हैं वो भी सही टाइम पर 

कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो की बातें सुनकर तुरंत रिप्लाई कर देते हैं। लेकिन ये अपने दुश्मनों को रिप्लाई देते हैं सही वक्त पर, सही जगह पर और सही तरीके से, जैसा कहते हैं ना कि सही टाइम पर बताऊंगा, बदला जरूर लूंगा। 

ये बदला ले ही लेते हैं और इनका बदला बड़ा ही अलग और अनोखे अंदाज का होता है, कई बार सामने वालों को पता भी नहीं चलता कि बदला ले लिया गया है। और ये बदला लेकर मन ही मन खुश हो जाते हैं। ये ऐसे ही बातों में नहीं आते और बड़ा अच्छा बदला लेते हैं आपके अंदर भी होंगी ऐसी कुछ बातें, मुझे Comment में जरूर बताना।

गलतियों से सीखते-

ये अपनी और दूसरों की गलतियों से सीखते हैं। साधारण सी चीज है जब आप कम बोलोगे, और दूसरों को ऑब्जर्व करोगे तो दूसरों की गलतियां भी आपको मालूम चलेंगी और उन गलतियों से भी आप बहुत कुछ सीखते हो। 

आचार्य चाणक्य ने चाणक्य नीति में बताया है कि आप अपनी गलतियों से सब कुछ नहीं सकते। कुछ आपको दूसरों की गलतियों से भी सीखना पड़ेगा क्योंकि आपके पास इतना टाइम ही नहीं है। 

जैसे- मान लीजिये कि आप अभी बच्चे हो, धीरे-धीरे बड़े होकर जवान हो जाओगे फिर शादी हो जाएगी। आपके बच्चे बड़े होंगे उनकी शादी हो जाएगी और आप मर जाओगे। सीखोगे कब? नहीं सीख पाओगे। 

इतनी गलतियां आप करने तो बैठोगे नहीं। लोगों की गलतियों से सीखो, ये लोग सीखते बहुत अच्छा हैं कि लोग क्या गलती कर रहे हैं? उन से सीखेंगे, अच्छा इसमें यह गलती है। 

यह जरूरी नहीं समझते सामने वाले को उसकी गलती बताना क्योंकि इन्हे पता होता है कि जब ये उसकी गलतियाँ बताएंगे तो मुफ्त का ज्ञान किसी को नहीं पचता। जिसको भी मुफ्त का ज्ञान दिया जाए तो उल्टा ही समझता है। 

जैसे कि उसको चिढ़ाया जा रहा हो और हो सकता है कि वो पलट कर जवाब दे दे कि मुझको सब पता है, अपने काम से काम रखो या अपने मतलब से मतलबरखो। तो ये इसी वजह से लोगों को उनकी गलतियाँ नहीं बताते बल्कि उनकी गलतियों से सीखते रहते हैं, दुनियादारी से सीखते रहते हैं।

अक्सर समझा जाता है कि इन कम बोलने वाले लोगों को देश दुनिया का पता नहीं होता है। लेकिन असल में इन्हे ही देश दुनिया का पता होता है, यह दिखाना कि मुझे सब पता है यह अलग चीज होती है 

और पता होना यह अलग चीज। ये दिखावे में कम रहते हैं जिससे ये कई बार मुसीबत में पड़ जाते है जिससे थोड़े परेशान जरूर होते हैं लेकिन परेशानी से निकल भी जाते हैं। 

विशेष तौर पर शॉर्ट-टर्म में इनका नुकसान होता है लेकिन लंबे टाइम के लिएदेखा जाए तो लंबे पीरियड में कम बोलने वालों/आपका बड़ा फायदा है तो मेरी यही सलाह हैं कि शॉर्ट टाइम के लिए परेशान मत हुआ करो, लंबे समय के निवेश में ही आपका फायदा है।

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निष्कर्ष-

अब इस लेख से आप जानते है कि ज्यादा बोलने वाले लोग कैसे होते हैं? साथ ही कम बोलने के फायदे कितने हैं और कहां-कहां पर काम करते है, अब आप जान चुके हैं कि कम बोलने वाले और ज्यादा बोलने वालों में से सबसे ज्यादा खुश कौन रहता है

देखिये! इंसान बोलना तो 5 साल की उम्र में जान जाता है लेकिन क्या बोलना है और कैसे बोलना, कितना बोलना है यह पूरी उम्र सीखता रहता है, अगर आपको भी ज्यादा बोलने की लत है तो आज से ही आप अपनी लत में सुधार करना शुरू कर देंजिससे आपकी कई समस्याएंअपने आप ही कम और ख़त्म हो जाएंगीं. 

आशा है कि आपको यह लेख ज्यादा बोलने वालों से क्यों बेहतर होते हैं कम बोलने वाले?” अच्छा लगा होगा। पसंद आया हो तो share करें जिससे किसी जरूरतमंद की मदद हो जाए. 

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