हमारा सौरमंडल, उसकी संरचना और ग्रहों का विस्तार
आज हम ब्रह्मांड या अंतरिक्ष में जहां तक देख और जान या समझ पाए हैं उन सबकी शुरुआत हमारे सौरमंडल से होती है. सौरमंडल जिसे अंग्रेजी में Solar system कहा जाता है, इतना विशाल है जिसमें हमारे तारे सूर्य के साथ 08 ग्रह और उनके उपग्रहों के अलावा अभी तक ज्ञात लगभग 210 खगोलीय पिंड और असंख्य धूमकेतु, उल्का और गैसीय बादल मौजूद हैं.
हमारे सौरमंडल में 01 तारा जिसे हम सूर्य के नाम से जानते हैं के साथ 08 ग्रह क्रमानुसार बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस (अरुण) और नेपच्यून (वरुण) मौजूद हैं. इसी के साथ हमारे सौमंडल में एक नौवां ग्रह प्लूटो भी था, जिसे साल 2006 के बाद सामान्य ग्रह की श्रेणी से निकाल कर क्षुद्रग्रह (Dwarf Planet) की श्रेणी में रखा या डाल दिया गया है।
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सूर्य हमारे सौरमंडल का केंद्र है और धरती सहित बाकी सभी ग्रह इसकी परिक्रमा करते हैं। असल में अपने सौरमंडल की संरचना देखकर हम कह सकते हैं कि सूर्य सौरमंडल का मुखिया है और बाकी सब ग्रह और उपग्रह इसके सदस्य।
निकोलस कॉपरनिकस पहले व्यक्ति थे जिन्होने 1543 ई0 में सबसे पहले अन्तरिक्ष का अवलोकन किया और बताया कि पृथ्वी सहित बाकी सभी ग्रह जो हमारे सौरमंडल में मौजूद हैं सूर्य की परिक्रमा या चक्कर लगाते है। इससे पहले लोग पृथ्वी को ही ब्रह्मांड का केंद्र मानते थे। हमारे सौरमंडल में 01 तारा और 08 ग्रह हैं, चूंकि मंगल और बृहस्पति ग्रह के बीच एक स्ट्रोइड बेल्ट (Asteroid Belt) मौजूद होने से वैज्ञानिकों ने इन ग्रहों को 02 भागों में विभाजित किया है-
- आंतरिक ग्रह (Internal Planets) और क्षुद्रग्रह घेरा (Asteroid Belt) के बाद वाले
- बाहरी या बाह्य ग्रह (External Planets)
आइए जानते हैं हमारे सौरमंडल में कौन-कौन से पिंड और ग्रह हैं-
हमारा सौरमंडल और सूर्य (Sun)-
सबसे पहले बात करते हैं सूर्य की जो कि हमारे सौरमंडल का केंद्र बिन्दु होने के साथ सौरमंडल का सबसे बड़ा पिंड भी है और अपने प्रकाश से सौरमंडल के सभी ग्रहों को रोशन करता है। सूर्य का जन्म आज से लगभग 4.6 बिलियन साल पहले हुआ था।
वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि हमारा सूर्य ज्यादातर हाइड्रोजन और हीलियम आदि गैसों से बना हुआ है। चूंकि सूर्य एक तारा है इसलिए इस पर मौजूद पदार्थ प्लाज़्मा के रूप में होते हैं। इसकी सतह का तापमान लगभग 5500 डिग्री सेल्सियस और कोर का तापमान लगभग 15 लाख डिग्री सेल्सियस के बराबर है।
जिस प्रकार सौरमंडल में पृथ्वी सहित अन्य ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं ठीक उसी प्रकार सूर्य भी हमारी आकाश गंगा “मिल्कीवे” के केन्द्र की परिक्रमा करता है। हमारे सूरज को “मिल्कीवे” के केन्द्र की परिक्रमा या चक्कर पूरा करने में लगभग 225-250 मिलियन वर्ष लग जाते हैं।
आंतरिक ग्रह (Internal Planets)-
बुध से मंगल ग्रह तक के ग्रह हमारे सौमंडल के आंतरिक ग्रह के अंतर्गत आते हैं- आइए एक-एक कर इन्हे जानते हैं-
बुध (Mercury)-
बुध हमारे सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह होने के साथ सूर्य के सबसे निकट का ग्रह भी है। सौरमंडल के अन्य ग्रहों की अपेक्षा बुध ग्रह सबसे तेजघूमता है जिस कारण यह सूर्य का एक चक्कर मात्र 88 पृथ्वी दिनों में पूरा कर लेता है।
दिन के समय बुध ग्रह का तापमान लगभग 400 डिग्री सेल्सियस और वहीं रात के समय यह तापमान गिरकर –170 डिग्री सेल्सियस तक आ जाता है। तापमान में इतना उतार-चढ़ाव होने का कारण यह है कि बुध ग्रह पर कोई वातावरण मौजूद नहीं है जो सूर्य से आ रही ऊर्जा (गर्मी) को ग्रह पर रोक सके। भोर और साँझ का तारा बुध और शुक्र दोनों ग्रहों को कहा जाता है।
शुक्र (Venus)-
सूर्य से दूसरे स्थान पर आने वाला ग्रह शुक्र हमारे सौरमंडल का सबसे गर्म ग्रह है। इसका तापमान दिन और रात दोनों समय में लगभग 475 डिग्री सेल्सियस बना रहता है। इतना घोर तापमान बने रहने के कारण शुक्र ग्रह का वातावरण है, जहां 96 प्रतिशत कार्बन डाइऑक्साइड मौजूद है।
जो कि एक ग्रीनहाउस गैस है जो ताप (गर्मी) को ग्रह पर कैद करके रखती है। बनावट और आकार में शुक्र ग्रह लगभग पृथ्वी के समान है। इसलिए शुक्र को पृथ्वी की बहन कहा जाता है, साथ शुक्र को सौंदर्य का देवता भी कहा जाता है
क्योंकि शुक्र ग्रह रात के आसमान में सबसे चमकदार ग्रह है और जिसे धरती से आसानी से देखा और पहचाना जा सकता है। सौरमंडल के शुक्र और यूरेनस ग्रह, वो ग्रह है जो पूरब से पश्चिम की ओर घूमते हैं।
पृथ्वी (Earth)-
हम इन्सानों का घर पृथ्वी हमारे सौरमंडल का एकमात्र ग्रह है जहाँ जीवन का अस्तित्व मौजूद है। अन्तरिक्ष से पृथ्वी को देखने पर पृथ्वी हमें 03 रंगों मेंदिखाई देती है-
- नीला- पृथ्वी का नीला रंग यहां पर मौजूद जल के महासागरों को दर्शाता है।
- सफ़ेद- सफ़ेद रंग पृथ्वी के बादलों का और
- हरा- हरा रंग यहां पर मौजूद वनस्पति और हरियाली को दर्शाता है।
हमारी धरती के वातावरण में नाइट्रोजन, कार्बन-डाइऑक्साइड, ऑक्सीजन और जल वाष्प आदि गैसें मौजूद होने के साथ हमारे ग्रह पर एक ओजोन परत भी है जो सूर्य से आने वाली हानिकारक (Ultraviolet, x-ray) किरणों से पृथ्वी पर मौजूद जीवन की रक्षा करती है।
वैज्ञानिकों का मानना है पृथ्वी पर जीवन पनपने का मुख्य कारण पानी है, जो हमारे पृथ्वी ग्रह पर 71 प्रतिशत मात्रा में मौजूद है।
मंगल (Mars)-
मंगल ग्रह को “लाल ग्रह” (Red Planet) के नाम से भी जाना जाता है। इसका लाल रंग आयरन-ऑक्साइड के कारण है। यह धरती से मिलता-जुलता ग्रह है। जैसे कि मंगल ग्रह पर भी धरती की तरह ही बादलों वाला वातावरण है। लेकिन पृथ्वी के मुक़ाबले इसका वातावरण विरल है।
सौरमंडल का सबसे ऊँचा पर्वत, ओलम्पस मोन्स (Olympus Mons) मंगल पर ही स्थित है। सौरमंडल के सभी ग्रहों में हमारी पृथ्वी के अलावा, मंगल ग्रह पर जीवन और पानी (तरल रूप में) होने की संभावना सबसे अधिक है।
अभी हाल में मंगल ग्रह पर जीवन के अस्तित्व की खोज के लिए अमेरिकन अंतरिक्ष एजेन्सी नासा ने पर्सिवरेंस रोवर मिशन भेजा है, जो मंगल ग्रह पर मौजूद जेजेरो क्रेटर पर सफलतापूर्वक उतर चुका है. मंगल के दो चन्द्रमा, फो़बोस और डिमोज़ (Phobos and Deimos) हैं। इस ग्रह को पृथ्वी से नंगी आँखों से देखा जा सकता है।
बाहरी ग्रह (External Planets)-
अब बात करते हैं हमारे सौरमंडल के बाहरी ग्रहों (External Planets) की, जो क्षुद्रग्रह घेरे के बाद बृहस्पति से आरंभ होकर यूरेनस (वरुण) ग्रह तक फैला है-
बृहस्पति (Jupiter)-
बृहस्पति ग्रह हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा और भारी ग्रह है। हमारे सौरमंडल में शुक्र ग्रह के बाद बृहस्पति ग्रह सबसे ज्यादा चमकने वाला ग्रह है। इस ग्रह का आकार हमारे ग्रह पृथ्वी की त्रिज्या से लगभग 11.2 गुना विशाल है।
बृहस्पति ग्रह हमारे तारे सूर्य की तरह ही अधिकतर हाइड्रोजनऔर हीलियम से बना है। अपने मजबूत गुरुत्वाकर्षण के कारण बृहस्पति ग्रह को सौरमंडल का वैक्यूम क्लीनर भी कहा जाता है, क्योंकि यह अपने तगड़े मग्नेटिक फील्ड से आवारा घूमते उल्का पिंडों और खतरनाक धूमकेतुओं को अपनी ओर खींच लेता है।
जिससे आंतरिक ग्रहों को सुरक्षा मिल जाती है। बृहस्पति ग्रह पर अक्सर तूफान चलते रहते हैं क्योंकि यह ग्रह बड़ा आकार होने के बावजूद तेजी सेधूमता है। बृहस्पति ग्रह के अभी तक ज्ञात कुल 79 उपग्रह या चन्द्रमा है। जिनमें से 04 मुख्य चंद्रमा हैं जिनकी खोज मशहूर खगोल खोजकर्ता गैलीलियो गैलिली ने सन 1600 में की थी, और जिन्हे गैलीलीयन चंद्रमा भी कहा जाता है-
- गैनिमीड (Ganymede) इसका सबसे बड़ा चन्द्रमा है जो व्यास में बुध ग्रह से बड़ा है।
- यूरोपा (Europa), यह बृहस्पति का बर्फ़ीला चंद्रमा है, जहां बर्फ के नीचे तरल जल मौजूद हो सकता है।
- कैलिस्टो (Callisto), इसकी सतह पत्थर और बर्फ से बनी है, इसके साथ इस चंद्रमा पर ‘वल्हाला‘ नाम का एक क्रेटर भी बना हुआ या मौजूद है। और
- आई ओ (IO), बृहस्पति का यह चंद्रमा पृथ्वी के चंद्रमा से लगभग 5% बड़ा है, इसकी सतह पर सिलिकेट की अधिकता है और अवलोकन करने पर यह कई रंगो का दिखाई देता है, जिसमें मुख्य रंग है- पीला।
शनि (Saturn)-
बृहस्पति के बाद हमारे सौरमंडल दूसरा सबसे बड़ा और सौमंडल का छठा ग्रह है शनि। इसके छल्ले (Rings) ही इस ग्रह की पहचान हैं। वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययनों और शोधों से पता चला है कि शनि ग्रह के कई छल्ले काफी पतले हैं साथ ही जो बर्फ से बने हुए हो सकते हैं।
शनि ग्रह के पास अब तक सबसे अधिक संख्या में 82 उपग्रह या चंद्रमा हैं। टाइटन (Titan) शनि ग्रह का सबसे बड़ा चंद्रमा है जो बृहस्पति के गैनिमीड (Ganymede) के बाद दूसरा सबसे बड़ा प्रकृतिक उपग्रह या चंद्रमा है।
- टाइटन (Titan)- शनि ग्रह का यह छठा उपग्रह या चंद्रमा सौमंडल का मात्र एक ऐसा चंद्रमा है, जहां पर वातावरण मौजूद होने की पुष्टि हुई है। हालांकि यहां का वातावरण पृथ्वी से बिलकुल अलग है, साथ ही इस उपग्रह का तापमान शून्य से 180 डिग्री सेल्सियस नीचे ही रहता है, कसिनी और हायगेन्स अंतरिक्षयान द्वारा भेजे गए चित्रों से पता चला कि इस उपग्रह पर नदियां, क्रेटर और तालाब मौजूद हैं, जो संभवत: तरल मीथेन के हो सकते हैं, ऐसा शोधकर्ताओं का मानना है।
अरुण (Uranus)-
यूरेनस जिसे अरुण ग्रह के नाम से भी जाना जाता है, बृहस्पति और शनि के बाद तीसरा सबसे बड़ा और हमारे सौरमंडल का सातवाँ ग्रह है। आकार में अरुण ग्रह हमारे ग्रह पृथ्वी की तुलना में 63 गुना विशाल है जबकि द्रव्यमान का मात्र 14.5%। अरुण ग्रह का अक्षीय झुकाव 97.77 है, जो कि सबसे ज्यादा है, यह लगभग अपने अक्ष पर उल्टा है।
अरुण ग्रह का अवलोकन करने पर यह बृहस्पति और शनि ग्रह जैसा ही प्रतीत होता है लेकिन तापमान की दृष्टि से अरुण ग्रह बेहद ठंडा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अरुण ग्रह सूर्य से ज्यादा दूरी पर स्थित है। 13 मार्च 1781 में विलियम हरशल ने अरुण ग्रह की खोज की थी।
वैज्ञानिकों का मानना है कि अरुण ग्रह पर पानी की बर्फ़ के अलावा मीथेन और अमोनिया जैसी गैसें भी बर्फ की तरह जमी हो सकती है। इसके साथ ही अरुण ग्रह ग्रह के पार या इसके इर्द गिर्द छल्ले भी मौजूद हैं जिनका रंग प्रायः काला है।
अरुण ग्रह के अभी तक ज्ञात कुल 27 प्रकृतिक चंद्रमा या उपग्रह मौजूद हैं- जिनमें से 05 चंद्रमा मुख्य हैं-
वरुण (Neptune)-
नेपच्यून जिसे वरुण भी कहा जाता है, हमारे सौरमंडल का सबसे आखिरी आठवां ग्रह है, यह ग्रह भी यूरेनस की तरह का है, इस ग्रह को देखने के लिए बेहतरीन क्षमता वाले टेलिस्कोप या दूरबीन की जरूरत पड़ती है क्योंकि वरुण ग्रह पृथ्वी से बहुत अधिक दूरी पर स्थित है, देखने पर यह नीले रंग का दिखाई देता है.
अपने विशाल आकार के कारण वरुण ग्रह को “नीला दानव (Blue Giant)” भी कहा जाता है। अपने तारे मतलब सूर्य का एक चक्कर लगाने में वरुण ग्रह को 164.79 वर्षों का समयलग जाता है. सौरमंडल के इस ग्रह पर भी अरुण ग्रह की तरह पानी की बर्फ़ के अलावा मीथेन और अमोनिया जैसी गैसें भी बर्फ की तरह जमी हो सकती है।
नेपच्यून ग्रह के अभी तक ज्ञात कुल 13 प्राकृतिक चंद्रमा या उपग्रह हैं। ट्राइटन (Triton) वरुण ग्रह का एक मात्र ऐसा चंद्रमा या उपग्रह है, जिसके पास अपना खुद का गुरुत्वाकर्षण है. अरुण ग्रह की तरह वरुण ग्रह के पास भी पतले छल्ले मौजूद हैं।
बौना ग्रह (Dwarf Planets)-
बौने ग्रह (Dwarf Planets) वे ग्रह या खगोलीय पिंड होते हैं जो आकार में छोटे होते हैं और अपने मेजबान तारे का चक्कर बेढंग तरीके से लगाते हैं। अभी तक हमने अपने उन्नत तकनीकों की मदद से अपने सौरमण्डल में 05 बौने ग्रहों की खोज की है-
- यम (Pluto),
- सीरीस (Ceres)- बौने ग्रहों में सबसे बड़ा ग्रह है,
- हउमेया (Haumea),
- माकेमाके (Make-make), और
- ऍरिस (Eris)
प्लूटो यानी यम को साल 2006 से पहले एक ग्रह ही माना जाता था लेकिन 2006 में अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ ने इसे एक नई श्रेणी “बौने ग्रह”में रखा, जिसे अब बौने ग्रह के रूप मेंस्वीकार किया जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बौने ग्रहों की तरह बौने तारे भी होते हैं.
धूमकेतु (Comets)-
हममें से कई लोगों ने आकाश में पुच्छल तारे को देखा ही होगा, असल में ये पुच्छल तारे वास्तव में तारे नहीं बल्कि एक धूमकेतु होते हैं। धूमकेतु मुख्यत: चट्टान, पत्थर, धूल, बर्फ और गैसों के मिश्रण से बनेहोते हैं। जो सूर्य की एक लंबी अवधि की परिक्रमा करते हैं।
परिक्रमा करने के दौरान इन धूमकेतु पिंडों में गैसों और धूल के कण पूँछ का आकार ले लेती है साथ ही अपनी परिक्रमा के दौरान सूर्य के पास से गुजरने पर सूर्य के प्रकाश से ये कॉमेट और इनकी पूंछ चमक उठती है। जिसे हम अपनी नग्न आंखों से स्वत: देख पाते हैं।
उल्कापिंड (Meteors)-
हमारे सौरमंडल में कई ऐसे पिंड मौजूद हैं जो न तो ग्रह हैं और न ही उपग्रह या क्षुद्रग्रह. अंतरिक्ष में ऐसे पिंडों को उल्का या उल्कापिंड कहा जाता है, ये पिंड चट्टानोंया धातुओं के छोटे टुकड़े होते हैं। जब क्षुद्रग्रह मजबूत गुरुत्वाकर्षण से टूटते या बिखरते हैं तो यह बिखरा हुआ मलबा उल्काओं में बदल जाता है।
ये छोटे-छोटे उल्का टुकड़े जब किसी ताकतवर गुरुत्वाकर्षण के संपर्क में आते है तो इनमें तेज दबाव और घर्षण के कारण आग लग जाती है, तब ये उल्का से उल्कापिंड बन जाते हैं। हममें से कई लोगों ने टूटते तारे को देखा ही होगा. असल में तारा कभी नहीं टूटता बल्कि हम जिसे टूटता हुआ देखते हैं, वह उल्कापिंड ही होता है।
इन उल्कापिंडों के आकार में कई विविधता होती है, छोटे आकार के उल्कापिंडो में किसी ग्रह को हानि पहुचानेकी गुंजाइस न के बराबर होती है जबकि कुछ बड़े उल्कापिंड ग्रह या उपग्रह के अस्तित्व को खतरे में डाल सकते हैं। साधारण शब्दों में तबाही मचासकते हैं।
हमारी पृथ्वी से भी आज से कई सालों पहले एक उल्कापिंड टकराया था. उल्कापिंड की इस टक्कर से पृथ्वी पर मौजूद जीवन (डायनोसोर युग) का अंत हो गया था, जिसके बाद सृष्टि ने पुन: एक नए आयाम की रचना आरम्भ की और जीवन को कई स्तरों में विकसित किया।
सौरमंडल से संबंधित सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तर-
प्रश्न- सूर्य से ग्रहों का क्रम क्या है?
उत्तर- सूर्य से क्रमानुसार ग्रह- बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस (अरुण) और नेपच्यून (वरुण) है एवं दूरी के आधार पर क्रम है-
1. बुध (Mercury) ग्रह 61.305 मिलियन किलोमीटर
2. शुक्र (Venus) ग्रह 108.39 मिलियन किलोमीटर
3. पृथ्वी (Earth) ग्रह 151.48 मिलियन किलोमीटर
4. मंगल (Mars) ग्रह 249.83 मिलियन किलोमीटर
5. बृहस्पति (Jupiter) ग्रह 752.27 मिलियन किलोमीटर
6. शनि (Saturn) ग्रह 1.4855 बिलियन किलोमीटर
7. अरुण (Uranus) 2.9528 बिलियन किलोमीटर
8. वरुण (Neptune) 4.4752 बिलियन किलोमीटर
प्रश्न- सौर मंडल में कितने ग्रह होते हैं?
उत्तर- हमारे सौरमंडल में कुल 08 ग्रह हैं।
प्रश्न- सौरमंडल में हम जैसे-जैसे सूर्य से दूर जाते हैं तो क्या होता है?
उत्तर- सौरमंडल में जैसे-जैसे हमारी दूरी सूर्य से बढ़ती जाएगी वैसे-वैसे हम सूर्य के प्रकाश और मिलने वाली ऊर्जा को खोते जाएंगे और ठंड की मात्रा बढ़ती जाएगी साथ ही एक स्थिति के बाद सब कुछ बर्फ में जम जाएगा और जीवन समाप्ति की शुरुवात आरंभ हो जाएगी।
प्रश्न- ब्रह्मांड और सौरमंडल में क्या अंतर है?
उत्तर- ब्रह्मांड अनंत है जिसका अभी तक कोई छोर नहीं मिला है, आज हम जो कुछ भी पदार्थ और ऊर्जा देख और महसूस कर रहे हैं वह सब कुछ ब्रह्मांड में ही निहित है, जबकि सौरमंडल ब्रह्मांड के अंतर्गत एक प्रणाली मात्र है,
हम जिस प्रणाली में रहते हैं, उसे सौरमंडल कहा जाता है, जबकि ब्रह्मांड ढेरों सौर-प्रणालियों से भरा पड़ा है। अभी हाल ही में एक नई सौर-प्रणाली की खोज की है, जिसका नाम अल्फा सेंटोरी (Alpha Centauri) है। जो एक triple star system सौर-प्राणली है।
प्रश्न- सबसे गर्म ग्रह कौन सा है?
उत्तर- हमारे सौरमंडल का सबसे गर्म ग्रह शुक्र (Venus) है। इसके वातावरण में बड़ी मात्रा में लगभग 96% कार्बन डाइ-ऑक्साइड (जो एक ग्रीनहाउस गैस है) की उपस्थिती है, जो ग्रह की ऊष्मा या गर्मी को ग्रह पर कैद या रोककर रखती है। जिससे शुक्र सौरमंडल का सबसे गर्म ग्रह बन जाता है, इसका तापमान हमेशा 475 डिग्री सेल्सियस बना रहता है।
प्रश्न- आकार में सबसे बड़ा ग्रह कौन सा है?
उत्तर- बृहस्पति (Jupiter)! हमारे सौरमंडल का आकार में सबसे बड़ा ग्रह है। शेष विश्लेषण के लिए ऊपर पोस्ट में पढ़ें।
प्रश्न- सबसे छोटा ग्रह कौन सा है?
उत्तर- हमारे सौरमंडल का आकार में सबसे छोटा ग्रह बुध (Mercury) है। बुध ग्रह लगभग 70% धातु और 30% सिलिकेट से बना है, बुध एक चट्टानी पिंड या ग्रह है।
प्रश्न- सूर्य से सर्वाधिक दूरी पर स्थित ग्रह कौन सा है?
उत्तर- सूर्य से सर्वाधिक दूरी पर स्थित वरुण (Neptune) ग्रह है। यह सूर्य से 4.4752 बिलियन किलोमीटर दूर स्थित है।
प्रश्न- सूर्य के सबसे नजदीक तारा कौन सा है? सूर्य के बाद पृथ्वी के सबसे नजदीक दूसरा तारा कौन सा है?
उत्तर- सेंटोरस तारामंडल के अंतर्गत आने वाला तारा प्रोक्सिमा सेंटौरी, जो सूर्य के बाद पृथ्वी के सबसे करीब है, और पृथ्वी से प्रोक्सिमा सेंटौरी की दूरी लगभग 4.27 प्रकाश-वर्ष है।
प्रश्न-पृथ्वी के प्राकृतिक उपग्रह का क्या नाम है?
उत्तर- चंद्रमा (Moon)।
प्रश्न- पीला ग्रह किसे कहते हैं और क्यों?
उत्तर- बृहस्पति को पीला ग्रह कहा जाता है क्योंकि यहां पर सिलिकेट की उपस्थिती के कारण बृहस्पति ग्रह पीले रंग का दिखाई देता है।
अंत में-
बिग-बैंग के बाद से अभी तक ब्रह्मांड के आकार में विस्तार हो रहा है मतलब जैसे-जैसे समय बीतता जा रहा है ब्रह्मांड का विस्तार होता जा रहा और वो भी प्रकाश की गति से भी तेज गति से, जिस कारण हमारे सौरमंडल में बदलाव आना निश्चित है और धीरे-धीरे हमारे सौरमंडल और उसके पिंडों, ग्रहों और उपग्रहों के बीच की दूरियों में बदलाव आने की संभावना बढ़ती जा रही हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में एक दिन ऐसा जरूर आएगा जब हमें अपना अस्तित्व बचाने के लिए किसी और सौरमंडल के ग्रहों पर स्थानांतरण करना पड़े और अपना नया आशियाना बसाना पड़े। तब तक के लिए हमें अपने सौरमंडल के बाहर के सौरमंडलों की खोज जारी रखनी पड़ेगी। और ऐसे ग्रहों या उपग्रहों की खोज करनी होगी जहां हम अपनी प्रजाति को सुरक्षित कर अपना अस्तित्व बचाए रख सकें।
आज की पोस्ट “हमारा सौरमंडल और उसके ग्रह“ में बस इतना ही, आशा है आपको सौरमंडल की समस्त जानकारी इस पोस्ट से मिल गई हो। इसके साथ ही अगर आप कुछ पूछना, कहना या सुझाव देना चाहते हैं तो comment box में लिखें।
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जय हिन्द! जय भारत!